
🌷 पल-पल है जुड़ा हुआ…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
कारें-कारें बादल छाएं, आधी-अधूरी सी रात…
राह तकते तकते, सहमें सहमें से हैं जज़्बात…
साये भी हैं सोये हुएं और सोया है सारा जहां…
ज़श्न काहे का मनाते हम कोई भी तो हों यहां…
सिर्फ तन्हाईयां बाक़ी हैं साथ निभानें के लिए…
साथ-साथ हाथों-में-हाथ होता सिर्फ ख़्वाबों में…
वो महकीं चांदनी-रातें, बिजली का यूं कड़कना…
ज़रा सी छेड़-छाड़, थोड़ा सा रूठना-फ़िर-मनाना…
यादों का यह सिलसिला, दिलचस्प सा नज़ारा…
आंखों में आंखें डाल कर, यूं हल्का-सा इशारा…
रातों को रोशन करता हुआ, वो चांद का मुखड़ा…
कायनात को सलाम करने पल-पल है जुड़ा हुआ…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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