
कविता : 🌷 बारिश की बूँदे…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
जैसे ही बारिश की बूँदे गिरतीं ज़मीं पर,
खुशियां-ही-खुशियां छा जाती हैं धरती पर…
गिरतीं टिप टिप टिप आवाज़ करती हुईं,
साथ में धूम मचाते बच्चों की दिल-जमाई…
लगातार बूँदे ऐसी पड़ती होती हैं आस्मां से…
जैसे बड़ी धूमधाम से, पानी आएं झरनों से…
चमकीली मोती की लड़ियां बिखर गई हों…
जैसे आस्मानी परी की मालाएं टूट गई हों…
इतना सुहाना होता है, बरसात का नज़ारा…
हर उम्र में दिल छू ही लेता है वो जादू-भरा…
बारिश की रिमझिम फुहारों से प्यासी धरती…
हरी-भरीं सुंदर सी, और ही प्यारी है दिखतीं…
ज़मीन में से नये अंकुरित अनाज उग आएं…
इसी से किसानों के परिवार फूलें नहीं समातें…
बचपन याद दिलाती हैं काग़ज़ की कश्तियां…
बरसात में भीगने से मिलती है ढ़ेरों खुशियां…
बारिश की बूँदे बचपन से लेकर उम्र-भर ही…
सुनाती हैं कोई-न-कोई दिलचस्प सी कहानी…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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