
🌷 इक और आसमां…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
ज़िन्दगी बाक़ी है तो चलो ख़्वाब बुन लिएं जाएं
वर्ना क्या पता अचानक कब रात खत्म हो जाएं
जीवन पल-दो-पल का खेल है, कुछ अजीब सा
मन और बांहें फैलाएं तब ही मिलें जादूई सिक्का
सबकुछ झूठ होते हुए भी कमाल लगता है यहां
मानो किसी चक्रव्यूह में फंसा हुआ है सारा जहां
मन के झील में खिलने वाले अनगिनत से कमल
अगर नजरिया रख सकें सदा ही सीधा और सरल
एक आंख में चांदनी है तो दूसरी में होती नमी सी
हरेक जीवन में अक्सर उलझनों की नहीं है कमी
कोई बंदा दो निवालों की चाहत में कड़ी धूप सहें
वहीं पे नसीबों वाला धन की बारिश में भीगता रहें
आस्मां के उस पार भी इक और आसमां होता तो है
सिर्फ जरूरत है दिलों में उमंग और जूनून, जिंदा रहें
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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