Welcome to my poetry blog

I use this space to Catalogue the poems written by me.

Hope you enjoy them.

I am Tilottama Lele a poetry enthusiast.

By nature, am a spiritual person & an avid foodie who loves travelling.

Spending time with my grandsons is an absoute treat. Other than that I enjoy playing Sudoku, watching movies, trail walking and appreciating nature’s beauty in every form.

Also I love to write poetry in Marathi, Hindi and English. I have started this blog to keep a record of my poems which can then be shared with everyone.


🌷 जीवन-कश्ती कौन पार लगाएं…?


🌷 जीवन-कश्ती कौन पार लगाएं…?
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले

जो हृदय से ज्ञान-प्राप्ती करना चाहते हैं,
उन्हें गुरु स्वयं ही किसी-न-किसी रूप में,
जीवनयात्रा के दौरान ज़रूर मिल जाते हैं…

जन्म से लेकर जीवन में कईं मोड़ आते हैं…
श्री दत्तात्रेय ने कुल चौबीस गुरु बनाएं थें…
गुरु-जनों से सिखते हुए वे आगे बढ़ते गएं…

हम अगर गुमराह होतें हैं तो हमारे गुरुदेव,
ज़िन्दगी के मोड़ पे सही-सलामत पहुंचाएं…
बिना बताएं, हर मुश्किल आसान करते हैं…

जब नितान्त श्रद्धा से गुरु-सेवा निभाते हैं,
जीवन में सुख-समृद्धि-यश प्राप्त करते हैं…
सद्गुरु की छत्रछाया में ज़िंदगी बिता पाते हैं…

इन्सान के आद्य-गुरु तो माता-पिता होते हैं…
आगे चलके समय-समय पर गुरु प्रकटते हैं…
बिना गुरु के जीवन-कश्ती कौन पार लगाएं ?

आदिमाता-आदिशक्ती श्री माताजी रक्षा करें…
भूलें-भटके हरेक बन्दे को सही राह दिखाएं…
उन्हींके निर्मल चरणों में, सबकुछ समर्पित है…

🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆

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लेखनाचे प्रकार

भावगीत, भजन, भक्तिगीते, अभंग, भूपाळी, मराठी गझल, हिंदी गज़ल, अंगाई गीत, देशभक्तीपर गाणी बडबडगीते, बालगीते, युगुल प्रणय गीतं, शास्त्रीय संगीत-रागांवर आधारित बंदिश, कोळी गीते, नाट्य गीते, प्रार्थना, पावसाची गाणी, गवळण.

प्रेरणादायी व्यक्तिमत्व

छत्रपती शिवाजी महाराज, बाल शिवाजी -शिवबा, समर्थ रामदास स्वामी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभभाई पटेल, श्रीकृष्णाची शिकवण, भगवद्गीता, श्रीराम, अर्जुन, कर्ण, सिकंदर-पौरस

सणावारांवर बेतलेल्या कविता/गाणी

दिवाळी-भाऊबीज, गणेशोत्सव, पाडवा, गुढीपाडवा, दसरा, होळी, रंगपंचमी, धूलीवंदन, जन्माष्टमी, कोजागिरी पौर्णिमा, नवरात्र, आई अंबाबाई, शारदीय नवरात्रोत्सवाच्या पहिल्या माळेपासून, विजयादशमी पर्यंत प्रत्येक दिवसानिमित्त, गणेश चतुर्थी, संकष्टी, महाशिवरात्री, आषाढी एकादशी, विठ्ठल रखुमाई, हनुमान जयंती, वटपौर्णिमा, रक्षाबंधन, पोळा / पोंगल, दत्त जयंती, मकरसंक्रांत

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