
🌷 खुशियों की खुशबू फैलाएं…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
सृष्टि में हर चीज़ है गुण-दोषों का भंडार
पता नहीं क्या है मेघ और क्या है मल्हार…
मृग जानता नहीं कहां से खुशबू आती है
ज़िन्दगी भर पागल सा दर-दर भटकता है…
पता नहीं कब जानें है, जिसकी तलाश में
वक्त गंवाया, वो सुगंध छिपी है खुद ही में…
कमल कीचड़ में होकर भी कमाल करतें हैं
मनभावन रंग-भीनी-भीनी खुश्बू बिखेरतें हैं…
वो जानते तक नहीं हैं खूबसूरती के बारे में
फ़िर भी दुनिया को दिलचस्प नज़ारे देतें हैं…
विधाता ने विश्व में सादगी-सुंदरता रचाई है
हर फूल को रंगों, सुगंधों से आबाद किया है…
हरेक बन्दे में काफ़ी कुछ गुण मौजूद होते हैं
जरूरत है उन्हें ढूंढ़कर दुनिया के काम आएं…
अपने नाज़ुक आयु की चादर झीनी-झीनी सी…
दिल-दिमाग़-अहंकार की कोई सीमा तक नहीं…
कुछ न करने पे भी वक्त तो गुज़रने वाला ही है…
फ़िर क्यूं न गुल बनें, खुशियों की खुशबू फैलाएं…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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