
🌷 बात बन जाएं…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
लहरें उठती हैं जो हर पल-पल…
खुशियां बांट रहा है सागर-जल…
ये भक्ति-भरा दरिया दया का है…
उसके बूंद बूंद में भरीं करुणा है…
ये विधाता का है सारा करिश्मा…
भक्तिरस में बंधा हुआ पूरा जहां…
जो इस दुनियां में आए रोते हुए…
मंज़िल पाएं, जाएं मुस्कुराते हुए…
लोगों के मेले में हर कोई अकेला…
उम्र भर उम्मीद लेकर ढूंढ़ें सहेला…
ज़िन्दगी दूध के माफिक होती है…
जैसी मर्जी बनाएं बन ही जाती है…
जब कोई माखन बिलोने लगता है,
माखन-चोर कन्हैया जरूर मिलें है…
भक्ति के दरिया में से एक बूंद मिलें,
तो भी इस जीवन की बात बन जाएं…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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