
🌷जाने कैसे दिल खो गया…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
दिल के बदले में है चाहा,
इक दिल जो है प्यार-भरा…
थाम ही लिया है जो हाथ,
नटखट से बहाने के साथ…
इस दिल का यह खिलौना,
और सजना भी है दीवाना…
प्यार का ये अजूबा सा गहना…
आसान तो नहीं है संभालना…
मन-ही-मन में यूं मुस्कुराना…
और फ़िर वो सजना-संवरना…
आँतें-जातें दर्पण में निहारना…
कारण बिना ही बाल-संवारना…
आंखों-आंखों से इशारा करना…
बातों बातों में फ़िर यूं शर्माना…
नन्हा सा सपना हीं तो देखा था…
पता नहीं क्या से क्या हो गया…
ये कौन सा रोग जो लग गया…?
जाने कैसे यह दिल खो गया…?
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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