
🌷राज़ की बात...
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
जीवन की धमाचौकड़ी में इस कदर फंसे हैं…
फ़िर भी हरेक पल हंसते-हंसाते बिता रहे हैं…
जीवन है तो उथल-पुथल ऊंच-नीच होगी ही…
हलचल बिना, क्या हो सकती है ज़िन्दगानी ?
ये राज़ की बात है मुश्किलों के होते हुए भी,
उन्हें ज्यादा गौर फ़रमाने की जरूरत ही नहीं…
जिस गली से वो आयीं, दबे पांव वहीं से ही…
चलीं जाएगी मुंह छिपाए शर्म से पानी-पानी…
जहां हंसी-खुशी का राज, वहां वे टिकती नहीं…
एक ही म्यान में दो-दो तलवारें कैसे रह सकतीं ?
जो ग़मों का पहाड़ खड़ा करें, वो ही राह दिखाएं…
गर मन में दृढ़ विश्वास है, सबकुछ सही हो जाएं…
खुशहाल ज़िन्दगी की, एक यही राज़ की बात है…
दुनिया की सारी खुशियां ख़ुद ही आएं दौड़ी-दौड़ी …
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆















