
🌷 एक एहसास...
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
मनुष्य हरदम यूं इतराता है…
के सिर्फ वो सबसे बेहतर है…
जब चींटियों से वो टकराएं,
सोच में परिवर्तन आ जाएं…
हर जीव में, कण-कण में…
परमात्मा का अंश मिलें है…
अपनी अपनी जगह हरेक,
जीवन महत्व-पूर्ण होता है…
सांस लेते हैं, सांस छोड़ते हैं…
हमारे बस में कुछ भी नहीं है…
जब शरीर में आत्मा स्थित है,
देह-यंत्र काम करता रहता है…
जब नियंत्रण खोया सांस का,
छुट गया साथ भी आत्मा का…
स्थूल शरीर से सूक्ष्म शरीर का…
जैसे धरती और आसमान का…
हमारे इर्द-गिर्द हमारे आसपास…
अंधेरों से घिरा हुआ विजनवास…
ज़िन्दगी में जो बांध रखा विश्वास,
पीछे रहता है सिर्फ एक एहसास…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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