Welcome to my poetry blog

I use this space to Catalogue the poems written by me.

Hope you enjoy them.

I am Tilottama Lele a poetry enthusiast.

By nature, am a spiritual person & an avid foodie who loves travelling.

Spending time with my grandsons is an absoute treat. Other than that I enjoy playing Sudoku, watching movies, trail walking and appreciating nature’s beauty in every form.

Also I love to write poetry in Marathi, Hindi and English. I have started this blog to keep a record of my poems which can then be shared with everyone.


🌷अग्नि परीक्षा…

🌷अग्नि परीक्षा...
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले

ईश्वर ने नारी को जन्म से ही, 'सहना' सिखाया…
और दी बच्चे को जन्म देने की कठीन सी पीड़ा…

बिन तकरार, बिना बोले, सहते हुए भी हंसना…
होठों को सीलबंद रखकर, ज़िन्दगी को जीना…

कहने को कितना कुछ होते हुए भी, हर नारी…
हर युग में सहती रही, गुंगी ज़िन्दगी जीतीं रही…

युग बदले, नारी के नाम-किरदारों में बदलाव…
पर स्थिती में कुछ न बदला, फ़िर से घुमजाव…

रामायण पर्व में, बंद पिटारे में बालिका पायीं…
जब राजा जनक के पास, दरबार में लायीं गई…

नवजात इतनी-सुन्दर इतनी मासूमियत-से-भरी…
राजा ने उसे अपनाया और बनी वो राजकुमारी…

बिल्कुल देर ही नहीं लगती है नसीब बदलने में…
जन्म से छोड़ी हुई, पल में पलने लगी महलों में…

कहने को तो वह राजा की लाडली बेटी ही रही…
पिताश्री जनक-की-पुत्री, इसलिए नाम 'जानकी'…

यूं नाज़ों से पली, जब बड़ी हो गई राजकुमारी…
धुमधाम से स्वयंवर रचा कर उसकी हुई शादी…

दुनिया भर से अथि-रथी-महाशूर-वीर पधारे हुएं…
राजाओं में लंका से, लंका-पति रावण मौजूद थे…

महान शक्ति-शाली श्री-शिव-धनुष को उपर उठाना,
और उसपर प्रत्यंचा खींच के ठीक निशाना बनाना…

सब ही निशाने बाजों का घमंड, चूर चूर हो गया…
अपमानित-हुएं राजाओं में लंकापति शामिल था…

सिर्फ अयोध्या के राजकुंवर, राम को यश मिला…
और स्वयंवर के नियमों के अनुसार, ब्याह हुआ…

यशवंत निशाने-बाज-श्रीराम को चुना जानकी ने… 
वह अयोध्या की दुलारी बनीं, बड़े ही विश्वास से…

यहां तक नसीब में सब-कुछ ठीक से होता रहा…
फ़िर यकायक नियती ने मानो मुंह ही फेर लिया…

बारह साल का बनवास, राम को नसीब हुआ…
हंसते-हंसते जानकी ने भी पति का साथ दिया…

बन में रावण की नजर फ़िर से पड़ी सीता पर…
उसने जानकी-हरण कर लिया छल-कपट कर…

वो चिखी चिल्लायी पर उसकी एक भी न चली…
नियती का दौर इतना कठोर के किसी ने न सुनी…

सालों-साल बीतते गए, जानकी राह तकती रही…
फ़िर नसीब ने करवट बदली, वो रिहा कर दी गई…

ख़ुश हो ही रही थी तो संशय का भूत सवार हुआ…
सीता को "अग्नि परीक्षा" देने का फरमान सुनाया…

बोलने के लिए बहुत कुछ होके भी वो क्यों ना बोली ?
जानकी बेचारी बस सहती रही, परिक्षा देती ही रही…

वो धरतीं की बेटी, अग्नि उसका क्या बिगाड़ सकती ?
अग्निसे अनछुई सीता पर मन-ही-मन अपमानीत सी…

अंदर से क्रोधी होकर भी वह बाहर से ख़ुद शान्त रहीं…
"अग्नि परीक्षा"में विजय पाकर भी चुपचाप जीतीं रही…

गर्भवती होते हुए भी, फ़िर से बनवास पर भेजी गई…
अयोध्या की महारानी जानकी फ़िर भी चुप ही रही…

जुड़वां बच्चों को जन्म दिया, पाल-पोस-कर बड़ा किया…
बच्चों के उज्जवल भविष्य केलिए वो एक बेबस माता…

दिन-रात एक कर, लव-कुश की जिम्मेदारियां निभाने…
ज़िन्दगी भर लड़ी, बिना वजह ही अपमान सहते हुए…

हर युग में पात्र बदलें, पर पीड़ित जननी सहती रही…
बच्चों को संस्कार देती रही, उन्हें सुरक्षित करतीं रहीं…

वक़्त चाहे कैसा भी हो, बेबस माता बस सहती रही…
कहने-करने को इतना होते हुए भी, वो "मां" बनी रही…

हर युग में अलग किस्म की "अग्नि परीक्षा" देती रही…
अग्नि कुछ न कर पाया पर मन-ही-मन में जलती रही...

🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆
  • 🌷अग्नि परीक्षा…

    ईश्वर ने नारी को जन्म से ही, ‘सहना’ सिखाया…और दी बच्चे को जन्म देने की कठीन सी पीड़ा…हर युग में पात्र बदलें, पर पीड़ित जननी सहती रही… बच्चों को संस्कार…

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  • 🌷दर्पण में प्रतिबिंब…

    अगर हरेक बंदा ईश्वर की ही देन है, फ़िर ज़माने भर में ऊंच-नीच क्यों होने देता है…? वो सिर्फ़ एक सवाल बनकर, पीछे रह गया…दर्पण में प्रतिबिंब हक्का-बक्का सा रह…

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  • 🌷 मनाच्या सात-कप्प्यात…

    मनाच्या सात-कप्प्यात डोकावून पाहिलं…अन् सातही दरवाजांना बंद करुन टाकलं…पक्का बंदोबस्त म्हणून कुलूपसुध्दा लावलं…तरी हळुच निसटून गेला गतस्मृतींचा सुगंध…मनाच्या अथांग अकल्पनीय दालनात आला…सर्व बंधने झुगारून हृदयी विराजमान झाला…

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  • 🌷 सार्थकी लागले…

    ते हलक्या पावलांनी येणे, डोळे झाकून खुदकन हसणे, दुडू-दुडू धावतच कुशीत बिलगणे…हवे-हवेसे वाटले…त्या लबाड, हस-या नेत्रांना बघणे…झेप घेत कवेत येणे, हवे-हवेसे वाटले…त्या दुधाळ-मधुर-गोब-या गाली…वात्सल्याने संपूर्ण विश्वच व्यापले…

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  • 🌷 “This Too Shall Pass”…

    Our life is full of ups n downs…Der R smiles, tears, laughters n frowns…Whatever d situation may be, it’ll surpass…Need to remember, “This Too Shall Pass”

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  • 🌷 One Day At A Time…

    D hospital, Prison n D cemetery…They say we need to visit these places…Then only we’ll know d Life’s nuances…Life doesn’t last as long as we like…Life is short, we need…

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Poems by language


लेखनाचे प्रकार

भावगीत, भजन, भक्तिगीते, अभंग, भूपाळी, मराठी गझल, हिंदी गज़ल, अंगाई गीत, देशभक्तीपर गाणी बडबडगीते, बालगीते, युगुल प्रणय गीतं, शास्त्रीय संगीत-रागांवर आधारित बंदिश, कोळी गीते, नाट्य गीते, प्रार्थना, पावसाची गाणी, गवळण.

प्रेरणादायी व्यक्तिमत्व

छत्रपती शिवाजी महाराज, बाल शिवाजी -शिवबा, समर्थ रामदास स्वामी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर, स्वामी विवेकानंद, सरदार वल्लभभाई पटेल, श्रीकृष्णाची शिकवण, भगवद्गीता, श्रीराम, अर्जुन, कर्ण, सिकंदर-पौरस

सणावारांवर बेतलेल्या कविता/गाणी

दिवाळी-भाऊबीज, गणेशोत्सव, पाडवा, गुढीपाडवा, दसरा, होळी, रंगपंचमी, धूलीवंदन, जन्माष्टमी, कोजागिरी पौर्णिमा, नवरात्र, आई अंबाबाई, शारदीय नवरात्रोत्सवाच्या पहिल्या माळेपासून, विजयादशमी पर्यंत प्रत्येक दिवसानिमित्त, गणेश चतुर्थी, संकष्टी, महाशिवरात्री, आषाढी एकादशी, विठ्ठल रखुमाई, हनुमान जयंती, वटपौर्णिमा, रक्षाबंधन, पोळा / पोंगल, दत्त जयंती, मकरसंक्रांत

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