
कविता : 🌷 दिल बहल जाएं…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
पूनम की रात और चंद्रमा की रोशनी
मानो हुस्न परी जैसी लगती हैं चांदनी…
जैसे ही देखा चांद को मुस्कुराता हुआ
तन-मन बावरा बेवजह ही मचलने लगा…
झिरमिर आंचल आया, लहराता हुआ
मानो सजना से यूं गुफ्तगू करता हुआ…
अनगिनत सितारें झिलमिल करते हुएं•••
मानो चुपके-चुपके से इशारा करतें हुएं…
कलियों से खिलें हुए फूल जब महकाएं,
शर्मिले-प्यारभरे-नैनों के प्याले छलकाएं…
फूलों से बातें करती हवा हल्के गुनगुनाएं
ऐसे दिलचस्प नज़ारों में दिल बहल जाएं…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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