
🌷 जीतने की आरज़ू…
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
हर बंदा चाहता है, जीवन में जीत पाना…
पर वास्तव में आसान नहीं होता जीतना…
जीतने की सिर्फ तमन्ना काफ़ी नहीं होती…
जीतने वाली जिगर भी बेहद ही है जरूरी…
मुमकिन नहीं है, हर बाज़ी को जीत पाना…
लगन चाहिए, करने मुश्किलों का सामना…
जीतने का भी अजीब सा नशा चढ़ जाता है…
जो बाज़ीगर है, लाखों में भी चमक उठता है…
सिर्फ सपने देखने से काम नहीं बन सकता…
चाहिए ‘एकलव्य’ जैसा नेक-मजबूत इरादा…
आंखें मूंद कर भी वो निशाना कभी नहीं चूका…
"अंतस्थ-गुरु" काफ़ी है गर विश्वास हो पक्का…
जीवन में अगर सचमुच कुछ ख़ास पा लेना है,
जीतने की आरज़ू हर एक सांस में होनी चाहिए…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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