
🌷 जीवन-कश्ती कौन पार लगाएं…?
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
जो हृदय से ज्ञान-प्राप्ती करना चाहते हैं,
उन्हें गुरु स्वयं ही किसी-न-किसी रूप में,
जीवनयात्रा के दौरान ज़रूर मिल जाते हैं…
जन्म से लेकर जीवन में कईं मोड़ आते हैं…
श्री दत्तात्रेय ने कुल चौबीस गुरु बनाएं थें…
गुरु-जनों से सिखते हुए वे आगे बढ़ते गएं…
हम अगर गुमराह होतें हैं तो हमारे गुरुदेव,
ज़िन्दगी के मोड़ पे सही-सलामत पहुंचाएं…
बिना बताएं, हर मुश्किल आसान करते हैं…
जब नितान्त श्रद्धा से गुरु-सेवा निभाते हैं,
जीवन में सुख-समृद्धि-यश प्राप्त करते हैं…
सद्गुरु की छत्रछाया में ज़िंदगी बिता पाते हैं…
इन्सान के आद्य-गुरु तो माता-पिता होते हैं…
आगे चलके समय-समय पर गुरु प्रकटते हैं…
बिना गुरु के जीवन-कश्ती कौन पार लगाएं ?
आदिमाता-आदिशक्ती श्री माताजी रक्षा करें…
भूलें-भटके हरेक बन्दे को सही राह दिखाएं…
उन्हींके निर्मल चरणों में, सबकुछ समर्पित है…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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