कविता :🌷”जीवन एक तपस्या”


कविता :🌷 " जीवन एक तपस्या "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले

देखा जाए तो जीवन भी एक तपस्या है
बिना सोचे समझे जन्म से लेके करते हैं…

हर दिन दिल खोलके जी जानसे जीते हैं
हंसते-खेलते जी लेना भी एक तपस्या है…

ज़िन्दगी के हर मोड़ पे दो-दो राहे होती है
कब कौनसी चुनना भी एक परीक्षा ही है…

जहां देखो अच्छे-बुरे इन्सान दिखाई देते हैं
दिल सच्चे हैं पर चेहरे झूठे नक़ाब पहने हुए…

चोर चोरी से जाए पर ना हेरा-फेरी करने से
सही समय पे पर्दाफाश करना भी तपस्या है…

इस दिखावे की दुनिया में सच्चे-झूठे तो सब हैं 
सचमें असली-नकली की परख भी तपस्या ही है…

🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


error: Content is protected !!