
कविता : 🌷 " बस इतनी सी है शर्त "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
शर्त बस इतनी सी है,
के जब सचमुच आ जाएगा झुकना,
उसी पल सारी दुनिया क़दमों तलें होगी…
शर्त बस इतनी सी है,
के जब किसी रोते हुए को हंसाएंगे,
होटों पर मुस्कान अपने-आप खिलेगी…
शर्त बस इतनी सी है,
के दिल में हो दया और करुणा,
तो हृदय में बहेगा मानवता का झरना…
शर्त बस इतनी सी है,
के मन मन्दिर में हो दाता की मूर्ति…
तभी तो हो पाएगी सब इच्छाओं की पूर्ति…
बस इतनी सी तो है शर्त,
के किसी और का दर्द बांटने की जुर्रत,
जो भी करेंगे वे जीते जी पा लेंगे जन्नत…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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