
कविता :🌷 " अभी-अभी "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
किसी की आंखों में झांक कर देखा है अभी-अभी
अपनी ही अलग सी छबी दिख पड़ी है अभी-अभी
किसी मासूम ने हल्की सी दस्तक दी है अभी-अभी
दिल ही दिल में उमंगों की लहर उठी है अभी-अभी
अचानक से मौसम की रंगत बढ़ रही है अभी-अभी
चिड़ियों की चहचहाहट मीठी लग रही है अभी-अभी
ये क्या हुआ कि रात भी सुहानी लग रही अभी-अभी
ख़यालों ही ख़यालों में ज़िंदगी जन्नत बनीं अभी-अभी
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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