कविता :🌷”सुलगतें अरमान”


कविता :🌷 " सुलगतें अरमान "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले

अरमान ऐसे ऐसे की हम सोच भी नहीं सकतें…
जितने लोग उतने भिन्नभिन्न प्रकार विश्व में होते

कभी कभी संपूर्ण ज़िन्दगी, यूं ही कट जाती है…
सिर्फ उम्मीद और आरज़ूओं के सहारे लिए हुए

पर हसरतें पूरी नहीं होती सिर्फ सपने संजोने से…
दिल के अरमान अंदर-ही-अंदर सुलगते रहतें हैं

जेब से फ़कीर होके अमीरी के ख्वाब देखते हैं…
फ़िर मन के भीतर उमंगों का डेरा लिए घूमते हैं

छोटी से छोटी चीजों के लिए भी तरसते रहते हैं…
नसीब पलटकर अमीर हो जानेकी मन्नतें मांगते है

दौलतमंद होके भी तरसना खत्म नहीं होता इनका…
कोई और अरमान पूरे करने से भी दिल नहीं भरता

मुहब्बतवाले दिलोंमें धुआँ-धुआँ सुलगते हैं अरमान…
लम्हा-लम्हा गिनते रहते हैं मनमें इश्क़ का फ़रमान…

तन्हा दिलों में सदा केलिए सुलगते अरमान होते हैं …
पाप-पुण्य के चक्कर में ज़िंदगी यूं ही गुज़ार देते हैं

🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


error: Content is protected !!