कविता :🌷 " दुआएं रंग लाती हैं…"
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
ज़िंदगी है तो ग़म और खुशियां तो होंगी…
कभी तेज धूप तो कभी ठंडी छांव रहेगी…
जन्म से लेके उतार और चढ़ाव का सफ़र…
हथेलियों पर छपा हुआ लकीरों का मंज़र…
माता-पिताकी छाया और खूब प्यार-दुलार…
मानो खाना-पीना-खेलकूद, यही हों संसार…
फ़िर ऐसे मोड़ आए की मुश्किलों के पहाड़…
हर कोई सामने आकर के मार रहा हो दहाड़…
जो मुक़द्दर में लिखा, स्वीकार करना जरूरी…
दरमियान जो खोया, उसे भूलने की मजबूरी…
आंधी आये भी तो, सामना करनें की तैयारी…
जो सचमुच पाया उसे संभालने में होशियारी…
आधा प्याला खाली नहीं, आधा है भरा हुआ…
मानो तो ज़िंदगी है जुआ, या फ़िर वो है दुआ…
दुआओं का कोई रंग नहीं होता, ये तो सच है…
पर सच्चे दिलसे दीं दुआएं जरूर रंग लाती हैं…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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