कविता : 🌷 " बात बस इतनी सी "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
आकाश में उड़ान भरने की मनाही नहीं है,
शर्त ये की ज़मीन को नज़र अंदाज़ ना करें…
पलभर केलिए सिर्फ़ जरा सा याद करनेसे…
मोहब्बत का रंगीन सैलाब उमड़ उठता है…
सूरज के साथ दिन भी डूबने लग जाता है,
कैसे भी प्यार के उस समुंदर में तर जाना है…
कोई पानी में तेल कितना भी मिलाना चाहें,
वो घुलमिल जाता ही नहीं, किसी भी हाल में…
अक्सर चीज़े समय पे समझमें नहीं आती हैं…
जब आंख खुल जाएं बस वो ही "सुबह" है…
ऐसे में हर ज़िन्दगी से शर्त बस इतनी सी है,
कि चाहे कुछ भी हो जाए, कोई शर्त ही न हो…
बात बस इतनी सी है, मन में आशंका न हो…
चार दिनों की ज़िंदगी, हंसी-खुशी-से-भरी हो…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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