कविता:🌷 " खुशगवार ज़िन्दगी "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
किसी धड़कन में आज भी आवाज़ आती है
ढूंढे कहां कि ज़िन्दगी कब से थम सी गई है…
वो बहारें वो शोखियां जो सिर्फ याद आती हैं
देती हैं वे एहसास की जान अभी भी हाज़िर है…
जो मुश्किलें बढ़ती गई राहों में कांटे बिछाए हुए
घायल हो कर भी वो बेकरारी आज भी जिंदा है…
छोड़ दीं सारी दुनिया सिर्फ इसलिए कि चंद लम्हें
बिना किसी अफ़सोस से जी भी लेंगे हंसते-हंसाते…
तलाश है कि ज़िन्दगी में कोई संगी साथी यूं मिले
बाक़ी सारी उम्र इस सोचमें खुशगवार आज भी है…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆
Leave a Reply