कविता : 🌷” लहरें “~~~


कविता : 🌷 " लहरें "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले

जो होता है मन में, वो ही दिखाई दे सपनों में…
जैसे मासूम से बचपनमें सपने में भी खिलौने…

किशोरावस्था में पढ़ाई और खेलकूद छोड़के,
लगे रहते हैं रातदिन आंख-मिचौली खेलने में…

फ़िर युवावस्था में, चोरी-चुपके संदेशें भेजना…
बाग़ बगीचोंमें, वाचनालयों में मिलना-जुलना…

प्यारमें डूबकर दुनिया भूला देनेके वादे करना…
साथ-ही-साथ डटके पढ़ाई करनेमें जुट जाना…

अच्छे कर्मोंका फल भी उतना ही मीठा होता है
मां-बाप के आशीर्वादों से, कामयाब हो जाते हैं…

फ़िर इक हल्कीसी मुस्कान झलकती है, चेहरे पे…
साथ लातीं हैं अनगिनत प्यार मोहब्बतकी लहरें…

🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
🙏🕉️🔆

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


error: Content is protected !!