कविता :🌷 " इक आम सी हसरत "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
हम दिलो-जान से चाहें, या ना भी चाहे…
ज़िंदगी की रफ़्तार तो चल ही पड़ती है…
हर किसी की होती है अपनी अपनी चाल
हरेक की है कुछ अलग-अलग सी रफ़्तार…
फ़िर वो हो चंचल खरगोश या हो कछुआ,
या हो महाकाय हाथी या दौड़ता हुआ चूहा…
हमेशा वक़्त की होती है जानलेवा रफ़्तार
नसीब बनकर जन्मों के कर्म लाते हैं भूचाल…
चांद-सूरज-ग्रह-नक्षत्रों में होती है खास बात,
हर मानव के लिए वे लें आंतें है इक सौगात…
सबसे तेज, विभिन्न सी होती है मन की रफ़्तार
कोई कितनी भी कोशिशें करें, न रुके बार-बार…
इक आम सी हसरत होती है, हर धड़कते दिलमें
"अपना भी तो कोई खास हों" इस भरें संसार में…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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