कविता : 🌷 " ज़िंदगी के सफ़र में…"
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
माना कि अलग-अलग हैं
हर एक दरिया के किनारे…
फ़िर भी मन में उमंगे लेके
हम सफ़र पर चल ही पड़ें…
ज़िंदगी के सफ़र में…
हम इस क़दर खो गएं
आख़िर रात भी सो गई,
लेकिन हम कतई न सोएं…
ज़िंदगी के सफ़र में…
रास्ते गुम हो जाते हैं
मंजिल तब मिलती है
जब ख्वाहिशें खत्म होवें…
ज़िंदगी के अनोखे सफ़र में…
हर बंदा अकेला ही मुसाफ़िर है
कोई हमसफ़र मिल भी जाए…
तो सिर्फ चंद ही लम्हों के लिए…
ज़िंदगी के सफ़र में…
शायद साया साथ निभाएं…
पर जब बारिशें आ जाएं…
बूंदों में वो भी समां जाएं…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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