कविता :🌷 " ख़ामोश बातें "
कवयित्री : तिलोत्तमा विजय लेले
जो बात बिना बोले, मौन से, कही जा सकती है,
उन्हें चुनिन्दा शब्दों में भी बयां करना मुश्किल है…
समय ही वो ताकत है जो हर समयको बदल सकें,
सिर्फ़ समयको, थोड़ा अधिक समय देना जरूरी है
जब जब सन्नाटा, चुपके से शोर को निगल लें,
तन-मन में वो ही सन्नाटा फ़िर खूब शोर मचाएं…
तब दिन भर की मायूसी भी हाथों में हाथ डालें,
ढलती हुई घटा के साथ ही साथ, चल पड़ती है…
जो अपनापन हृदयके साथ-साथ ही दिया जाता,
वो धन से या सौ-हाथोंसे नहीं नापा जा सकता…
मन-ही-मन यादोंके गीत हर बार गूंजते-दोहरातें हैं
तभी हर पाषाण पिघलकर, आँखें नम हो जाती हैं
कुछ शख़्स यादोंके घरौंदोंमें भी शोर सा मचातें हैं
फिर अमृत-बेला, नैनों को ढकते हुए चलीं जाती है
रोशनी की चकाचौंध में दुनिया धुंधली हो जाती है…
किसीके पायल की खनक, चार चांद लगा देती है…
🌷@तिलोत्तमा विजय लेले
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